नितिन नवीन की नई टीम की पहली बैठक
|
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की नई दिल्ली में पहली बैठक में ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा प्रमुखता से उठा। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों के गायन से हुई। इसके बाद पार्टी ने संगठनात्मक रणनीति और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर चर्चा की, साथ ही कांग्रेस के रुख के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया।
बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC के उस फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो छंद गाने की बात दोहराई गई है। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा मुद्दा बताया और साफ कहा कि राजनीतिक या वोट बैंक के आधार पर इसके सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी ने इस मुद्दे पर देशभर में अभियान और राजनीतिक कार्यक्रम चलाने का भी ऐलान किया है।
वहीं, कांग्रेस अपने फैसले को नया नहीं बल्कि 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव का पालन बता रही है। CWC के अनुसार, पार्टी लंबे समय से अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो छंद ही गाती रही है और हालिया निर्णय इसी परंपरा को जारी रखने का है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उस दौर के शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रीय आयोजनों के लिए पहले दो छंदों को अपनाने का फैसला किया था।
इस विवाद के बीच ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कानूनी प्रावधान भी चर्चा में हैं। Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 के तहत राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या गायन के दौरान किसी सभा में बाधा पैदा करना दंडनीय अपराध है। कानून में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। हालांकि, कानून का प्रावधान मुख्य रूप से गायन को जानबूझकर रोकने या बाधा पहुंचाने से संबंधित है; इसे सामान्य रूप से ‘सिर्फ दो छंद गाने’ को सीधे अपराध बताने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
अब ‘वंदे मातरम्’ पर यह बहस सिर्फ गीत के छंदों तक सीमित नहीं रही है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान और पूरी ऐतिहासिक विरासत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस 1937 के अपने ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति में एक बड़े वैचारिक और राजनीतिक टकराव का रूप ले सकता है।