- नक्सलवाद की कमर तोड़ी, लेकिन दिमागी नक्सल का खतरा बरकरार
- घुसपैठ और डेमोग्राफी में बदलाव रोकने पर दिया जोर
- सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों से सतर्क रहने की अपील
- 2047 तक विकसित और सशक्त भारत बनाने का आह्वान
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PM Modi Attack on Opposition: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध पक्ष का दायित्व सरकार की नीतियों का विरोध करना है, लेकिन इस समय देश में विरोध पक्ष अपना कर्तव्य छोड़कर अवरोध पक्ष बन चुका है। अपनी हताशा और निराशा में ये लोग देश के विकास के सामने बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। यह विरोध नहीं, अवरोध है और इन्होंने इसी को अपनी राजनीति बना लिया है।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश में विभाजन की साजिशों में लगी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने और भारत की छवि खराब करने की कोशिशों के प्रति भी देशवासियों को आगाह किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है, लेकिन दिमागी नक्सल का खतरा अभी टला नहीं है। देश को ऐसे तत्वों से हमेशा सतर्क रहना होगा।
प्रधानमंत्री शनिवार को गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निकट राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का आह्वान किया।
मार्च 2026 तक कोई जिला नक्सल प्रभावित नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर उन्होंने देश को नक्सलवाद और माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया था। आज एक साल बाद देश उस संकल्प को पूरा कर चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में देश के 126 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे, लेकिन मार्च 2026 तक देश में ऐसा कोई जिला नहीं बचा, जो नक्सलवाद से प्रभावित हो।
पीएम ने कहा कि दशकों तक हिंसा और खूनखराबे से पीड़ित रहे ये जिले अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। वहां सड़कों का विस्तार हो रहा है, मोबाइल नेटवर्क पहुंच रहा है और स्कूल तथा स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ रही हैं। युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए सुरक्षा बलों के उन जवानों को भी नमन किया, जिन्होंने शांति स्थापित करने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
घुसपैठ और डेमोग्राफी में बदलाव रोकने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के महायज्ञ और सशक्त भारत की संकल्प यात्रा को रुकने नहीं देना है। इसके लिए अब देश को अगले बड़े लक्ष्यों पर काम करना होगा। उन्होंने देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करने, घुसपैठ और डेमोग्राफी में हो रहे बदलावों को रोकने तथा सेकुलर सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
वैश्विक संकट के बीच एकता को बताया भारत की ताकत
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय अशांति, युद्ध, आर्थिक संकट और संसाधनों की कमी से जूझ रही है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं और ऊर्जा संकट ने कई देशों के सामने मुश्किलें खड़ी की हैं। कई देशों में पेट्रोल और डीजल की खरीद पर सीमाएं लगानी पड़ीं। भारत के सामने भी संकट की आशंकाएं जताई जा रही थीं, लेकिन देश ने इसका असर अपने नागरिकों पर नहीं पड़ने दिया।
उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि इसमें देशवासियों की एकता और एकजुटता की भी बड़ी भूमिका रही। जब देश बाहरी चुनौतियों का समाधान तलाश रहा था, तब कुछ ताकतें भीतर झूठ और अफवाह फैलाकर अस्थिरता पैदा करने में जुटी थीं, लेकिन देशवासी राष्ट्र के साथ खड़े रहे।
गरीबी के मोर्चे पर 50 करोड़ लोगों को मिली राहत
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर आए हैं। उनके मुताबिक, पहले देश में हर 100 में से 27 लोग अत्यधिक गरीबी की चपेट में थे, जबकि अब यह संख्या तीन से भी कम रह गई है।
उन्होंने इसका श्रेय प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), मुफ्त राशन, मुफ्त इलाज, पक्के मकानों, शौचालयों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को दिया। पीएम ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले 25 करोड़ से भी कम लोगों के पास सामाजिक सुरक्षा कवच था, जबकि आज करीब 100 करोड़ लोगों को इससे जोड़ा जा चुका है।
सरदार पटेल ने 550 से अधिक रियासतों को एक किया
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के बिना आज के भारत की कल्पना करना मुश्किल है। उन्होंने आजादी के बाद 550 से अधिक रियासतों को एक कर देश को एकता के सूत्र में पिरोया। पटेल जानते थे कि भारत की विविधता उसकी बाधा नहीं, बल्कि एकता का वास्तविक आधार है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के माध्यम से देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान की नींव भी मजबूत की।
2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता, गणतंत्र और एकता दिवस तीनों राष्ट्रीय पर्व देश की चेतना और एकजुटता के प्रतीक हैं। अब 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के मंत्र के साथ विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे, तब तक भारत को सशक्त, समर्थ और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हर देशवासी को संकल्प के साथ काम करना होगा।