पंजाब में हाल ही में हुए दो कम तीव्रता वाले धमाकों के बाद राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। यह मामला अब सिर्फ सुरक्षा जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। इसी बीच राघव चड्ढा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कई गंभीर सवाल उठाए हैं। यह पूरा विवाद 5 मई को सामने आए घटनाक्रम से शुरू हुआ, जब जालंधर और अमृतसर में सुरक्षा प्रतिष्ठानों के पास छोटे धमाके हुए। जालंधर में बीएसएफ हेडक्वार्टर के पास और अमृतसर के खासा इलाके में आर्मी कैंप के बाहर ये घटनाएं हुईं। हालांकि ये धमाके बड़े नुकसान वाले नहीं थे, लेकिन इनसे सुरक्षा एजेंसियां और सरकार दोनों सतर्क हो गए।
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने शुरुआती जांच के आधार पर संकेत दिया कि इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े तत्वों की भूमिका हो सकती है। उनका कहना था कि राज्य में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है, खासकर संवेदनशील समय और जगहों पर। इसी बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन धमाकों को ज्यादा गंभीर नहीं बताया। उन्होंने कहा कि स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और इसे राजनीति से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विपक्ष, खासकर भाजपा पर आरोप लगाया कि वह आने वाले चुनावों से पहले डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
इसी बयान पर राघव चड्ढा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का रवैया सवाल खड़े करता है। चड्ढा ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री आईएसआई की भूमिका को कम करके आंक रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी के प्रभाव में आकर ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, एक मुख्यमंत्री को ऐसी संवेदनशील स्थिति में जिम्मेदारी से बयान देना चाहिए, न कि भ्रम की स्थिति पैदा करनी चाहिए। चड्ढा ने आगे कहा कि सरकार का काम सिर्फ बयान देना नहीं होता, बल्कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करना होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे विवादित बयान देने के बजाय जांच पर ध्यान दें और दोषियों को पकड़ने में पूरी ताकत लगाएं। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और भाजपा के बीच टकराव साफ नजर आ रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, जिससे माहौल और गर्म हो गया है। इसी बीच जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। इस मामले में अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी शामिल हो गई है। फॉरेंसिक टीमें घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच कर रही हैं। सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति को घटनास्थल से भागते हुए भी देखा गया है, जिससे जांच को और दिशा मिली है।
इसके अलावा एक और बड़ा दावा सामने आया है कि जालंधर धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान से जुड़े एक समूह ने ली है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच एजेंसियों ने नहीं की है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि यह मामला अब सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय संकेतों से जुड़ा हुआ बन गया है। एक तरफ जांच एजेंसियां सबूत इकट्ठा कर रही हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच आगे क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या सच में किसी बाहरी ताकत की भूमिका सामने आती है या नहीं। फिलहाल पंजाब में सुरक्षा और राजनीति दोनों ही चर्चा के केंद्र में हैं।