करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखती हैं महिलाएं चांद और पति का चेहरा? जानें परंपरा का महत्व

करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखती हैं महिलाएं चांद और पति का चेहरा? जानें परंपरा का महत्व
हाइलाइट्स
• करवा चौथ पर छलनी से चांद देखने की क्या है मान्यता?
• पति का चेहरा छलनी से क्यों देखती हैं महिलाएं?
• 29 अक्टूबर को रात 8:17 बजे चंद्रोदय का अनुमानित समय

करवा चौथ पर चांद को छलनी से देखने और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा निहारने की परंपरा खास मानी जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। पूजा, सोलह शृंगार और करवा माता की कथा के साथ यह रस्म भी व्रत का अहम हिस्सा है। लेकिन चांद और पति को छलनी से देखने के पीछे क्या मान्यता है?

इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। व्रत की शुरुआत सुबह सरगी खाने के बाद होती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने तथा पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद इसे पूरा किया जाता है।

करवा चौथ पर पति का चेहरा छलनी से क्यों देखती हैं महिलाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छलनी का इस्तेमाल चीजों को छानने के लिए किया जाता है। इसी काम को प्रतीकात्मक रूप से दांपत्य जीवन से जोड़कर देखा जाता है।

मान्यता है कि छलनी रिश्ते की बुराइयों और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने का प्रतीक है। इसके माध्यम से महिलाएं वैवाहिक जीवन में प्रेम और अच्छाई बने रहने की कामना करती हैं। इसी विश्वास के साथ चंद्रमा को देखने के बाद पति का चेहरा छलनी से देखने की परंपरा निभाई जाती है।

छलनी से चांद देखने के पीछे क्या है मान्यता?

करवा चौथ पर छलनी के माध्यम से चंद्रमा को देखने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के मुताबिक, महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में रात को चंद्रमा को सीधे देखने के बजाय छलनी से देखना अधिक सहज माना जाता है। इससे चांद की रोशनी हल्की दिखाई देती है और उसे देखने में सुविधा होती है।

इसके बाद महिलाएं छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस रस्म को पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से भी जोड़ा जाता है।

करवा चौथ 2026: कब निकलेगा चांद?

इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर को है। पंचांग के अनुसार, इस दिन चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट बताया गया है।

हालांकि, चांद निकलने का वास्तविक समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर का चंद्रोदय समय जरूर देखना चाहिए।

चंद्रमा को जल अर्पित करने और छलनी से चांद तथा पति का चेहरा देखने के बाद महिलाएं पति के हाथों जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं।