- मनुस्मृति के मूल स्वरूप को अपरिवर्तनीय रखने पर शंकराचार्य ने दिया जोर
- देशभर के विद्वानों की व्यापक सभा बुलाने का निर्णय
- प्राचीन पांडुलिपियों और वर्तमान प्रकाशनों के पाठ का होगा अध्ययन
- पंचांगों में तिथियों की विसंगतियां दूर करने पर भी चर्चा
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Manusmriti Amendment Controversy: मनुस्मृति में संशोधन को लेकर उठ रहे विवादों और सामाजिक भ्रम के बीच ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इसके मूल स्वरूप को अपरिवर्तनीय बनाए रखने पर जोर दिया है। इस विषय पर व्यापक विमर्श के लिए श्रीकाशी विद्वत परिषद न्यास देशभर के विद्वानों की सभा बुलाएगा। गुरुवार को वाराणसी के केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ में हुई परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मनुस्मृति और अन्य स्मृतियों के मूल पाठ, उनमें संशोधन के अधिकार तथा प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। तय किया गया कि आगामी विद्वत सभा में इन मुद्दों पर विद्वानों के विचार लिए जाएंगे, ताकि विषय से जुड़े विवादों और भ्रम पर शास्त्रीय दृष्टिकोण से विमर्श किया जा सके।
प्राचीन पांडुलिपियों के अध्ययन का प्रस्ताव
बैठक में आचार्य सुधाकर मिश्र ने देश के विभिन्न संग्रहालयों से प्रमाणित पांडुलिपियां मंगाकर उनके मूल पाठ और वर्तमान में प्रकाशित पुस्तकों के पाठ के बीच अंतर का अध्ययन कराने का प्रस्ताव रखा। इस पहल का उद्देश्य उपलब्ध प्राचीन स्रोतों के आधार पर पाठ की प्रामाणिकता और विभिन्न संस्करणों में मौजूद अंतर को समझना है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आगामी विद्वत सभा में स्मृतियों में संशोधन करने के अधिकार से जुड़े प्रश्न पर विस्तार से विचार किया जाएगा। इसमें विद्वानों के मत और संबंधित ग्रंथों के अध्ययन को आधार बनाया जाएगा।
पंचांगों की तिथियों में एकरूपता पर जोर
बैठक में पंचांगों में तिथियों की विसंगतियों और अलग-अलग पंचांगों के अनुसार त्योहारों के विभिन्न तिथियों पर मनाए जाने से पैदा होने वाले भ्रम पर भी चर्चा हुई। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पंचांगों में एकरूपता लाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता जताई।
धार्मिक पर्वों और त्योहारों की तिथियों को लेकर अलग-अलग मत सामने आने से श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनती है। बैठक में इस विषय के समाधान के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया गया।
त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशित करने का प्रस्ताव
परिषद की गतिविधियों और विभिन्न विषयों पर उठने वाले भ्रम के समाधान के लिए योगेश ब्रह्मचारी ने त्रैमासिक पत्रिका ‘विद्वन्मनोरंजिनी’ प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा। इसके माध्यम से धार्मिक, शास्त्रीय और अन्य विचारणीय विषयों पर विद्वानों के विचार सामने लाने तथा लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करने की योजना है।
बैठक में हुई चर्चा के अनुसार, मनुस्मृति के मूल पाठ, स्मृतियों में संशोधन के अधिकार, प्राचीन पांडुलिपियों के अध्ययन और पंचांगों में एकरूपता जैसे विषय आगामी विद्वत सभा के प्रमुख मुद्दे होंगे।