नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित; निर्णय कल

नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित; निर्णय कल
हाइलाइट्स
• नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई पूरी
• दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
• ₹10,000 के पर्सनल बॉन्ड पर विवाद
• शुक्रवार शाम 6 बजे आ सकता है फैसला

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट शुक्रवार शाम छह बजे अपना फैसला सुना सकती है।

नेहा बोरा ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने के लिए कहा गया था। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए गए, जबकि दिल्ली पुलिस ने याचिका के सुनवाई योग्य होने पर आपत्ति जताई।

नेहा बोरा के वकील ने नोटिस को बताया कानूनी रूप से गलत

नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में दलील दी कि एसईएम का नोटिस असंवैधानिक और कानूनी रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि कनॉट प्लेस में प्रदर्शन का आह्वान नेहा बोरा ने नहीं किया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत उठाए गए मुद्दे पर हाईकोर्ट को विस्तार से सुनवाई करनी चाहिए या मामले को धारा 126 के नोटिस और उसके कारणों तक सीमित रखना चाहिए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या संबंधित प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट को जांच के दौरान यह संतुष्ट करना होता है कि पर्सनल बॉन्ड क्यों नहीं लिया जाना चाहिए।

इस पर गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नोटिस केवल कॉपी-पेस्ट करके तैयार किया गया है। उन्होंने दलील दी कि पर्सनल बॉन्ड मांगने से पहले पूरी जांच जरूरी है। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच का भी यही फैसला है कि जांच पूरी होने से पहले मजिस्ट्रेट बॉन्ड की मांग नहीं कर सकता।

दिल्ली पुलिस ने याचिका की मेंटेनिबिलिटी पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा की याचिका की मेंटेनिबिलिटी यानी उसके सुनवाई योग्य होने पर गंभीर आपत्ति जताई। पुलिस ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं।

वकील का दावा- नेहा बोरा ने हिंसा भड़काने की बात नहीं की

गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि नेहा बोरा ने कभी हिंसा भड़काने की बात नहीं की और उनका रुख शांतिपूर्ण रहा है। वकील के अनुसार, वह केवल सुधारों की मांग कर रही थीं।

उन्होंने बताया कि 15 अक्तूबर को नेहा बोरा ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसके बाद 16 अक्तूबर को जंतर-मंतर को अचानक 'डिनोटिफाई' किए जाने के विरोध में उन्होंने शाम को मंडी हाउस में बैठक का आह्वान किया था। वकील ने कहा कि इस पोस्ट में हिंसा भड़काने, कानून तोड़ने या शांति भंग करने जैसी कोई बात नहीं थी।

वकील ने यह भी दलील दी कि कनॉट प्लेस में प्रदर्शन किसी अन्य संगठन ने आयोजित किया था, जबकि नेहा बोरा ने केवल मंडी हाउस में बैठक का आह्वान किया था।

नोटिस में बिना अनुमति राष्ट्रीय ध्वज फहराने का भी जिक्र है। इस पर वकील ने कहा कि तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शुरू की गई, जबकि नोटिस जारी करने वाला मजिस्ट्रेट खुद एक पुलिस अधिकारी है।

16 अक्तूबर को हिरासत में ली गई थीं नेहा बोरा

नेहा बोरा को 16 अक्तूबर को मंडी हाउस में एक सभा में शामिल होने के दौरान हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और आरके पुरम थाने में रातभर रखा गया। उनके मुताबिक, अगले दिन सुबह छह बजे उन्हें रिहा किया गया।

एसईएम के नोटिस में मंडी हाउस में नारेबाजी, निषेधाज्ञा के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन और कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने के आरोप लगाए गए हैं।

नेहा बोरा ने अपनी याचिका में कहा है कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका के समर्थन में कोई ठोस कारण, विशिष्ट घटना या समयावधि नहीं बताई गई है। अब मामले में हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।