अब भारत में बनेंगी विशाल टनल बोरिंग मशीनें, आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम!

अब भारत में बनेंगी विशाल टनल बोरिंग मशीनें, आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम!
हाइलाइट्स
• भारत में बनेंगी स्वदेशी TBM मशीनें
• 16 मीटर से ज्यादा व्यास वाली मशीनों की तैयारी
• 8 और 15 मीटर की TBM बनाने की क्षमता विकसित
• टनल निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर

भारत सुरंग निर्माण में इस्तेमाल होने वाली विशाल टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) के स्वदेशी निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस क्षेत्र में देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को रेखांकित किया है। भारत में 8 मीटर और 15 मीटर व्यास वाली टीबीएम बनाने की क्षमता विकसित की जा रही है, जबकि 16 मीटर से अधिक व्यास वाली मशीनों के निर्माण की तैयारी भी है।

टीबीएम तकनीक रेलवे, हाईवे और बिजली परियोजनाओं के लिए जमीन के भीतर सुरंग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित होने से भारत अपने डिजाइन, निर्माण और रखरखाव के इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

क्या है टनल बोरिंग मशीन और कहां होता है इसका इस्तेमाल?

टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम एक विशाल मशीन होती है, जिसका उपयोग जमीन के भीतर सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। रेलवे, हाईवे और बिजली परियोजनाओं में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

अब तक इन मशीनों के लिए भारत को बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन देश में अलग-अलग व्यास वाली टीबीएम बनाने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

8 और 15 मीटर की मशीनों से आगे बढ़ेगी स्वदेशी क्षमता

भारत में 8 मीटर और 15 मीटर व्यास वाली टनल बोरिंग मशीनों के निर्माण की क्षमता विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 16 मीटर से अधिक व्यास वाली मशीनें बनाने की तैयारी भी की जा रही है।

यह पहल देश में बड़ी सुरंगों के निर्माण से जुड़ी तकनीक और विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

तमिलनाडु में विकसित हो रही विनिर्माण सुविधाएं

तमिलनाडु में विनिर्माण सुविधाओं और बढ़ती तकनीकी विशेषज्ञता के सहारे भारत अपना टीबीएम इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। इसमें मशीनों के डिजाइन से लेकर उनके निर्माण और रखरखाव तक की क्षमताएं शामिल हैं।

स्वदेशी निर्माण क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करना और देश के भीतर तकनीकी विशेषज्ञता को मजबूत करना है।

बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में पहल

टनल बोरिंग मशीनों के निर्माण में स्वदेशी क्षमता विकसित होने से भारत को सुरंग निर्माण से जुड़ी तकनीक में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। यह पहल आयात पर निर्भरता घटाने के साथ देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।