आस्थावानों की आस्था पर चोट पहुंचाने वाले अयोध्या राम मंदिर कथित चढ़ावा घोटाले में SIT बने सात दिन हो चुके हैं लेकिन इस टीम की छह दिन की जाँच में क्या हासिल हुआ है इसको लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
क्या राम मंदिर के चढ़ावे में सचमुच कोई गड़बड़ी हुई है? यह सवाल आस्थावानों को कचोट रहा है। हालांकि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पहले कह चुके हैं कि ‘कुछ भी उल्लेखनीय नहीं’ मिला है। चंपत राय के बयान के बाद कई लोग सामने आये और उन्होने ज़मीन ख़रीद से लेकर चढ़ावा तक में गड़बड़ी होने के कई आरोप लगाए।
इसबीच ख़बर सामने आई है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्यमंत्री योगी जब अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने कहा कि इंतज़ार कीजिए दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। ऐे़से में SIT की क़वायद के बाद सवाल है कि क्या करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में कोई बड़ा खुलासा होने वाला है? और आखिर 6 दिन तक अयोध्या में डेरा डालने वाली SIT को क्या मिला?
अब इस जांच को लेकर जानकारी आई है कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर गठित विशेष जांच दल यानी SIT अपनी 6 दिन की जांच पूरी करके अयोध्या से वापस लौट गई है।जानकारी के मुताबिक, SIT ने इन 6 दिनों के दौरान 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की है।
सूत्रों का कहना है कि जांच टीम ने मामले से जुड़े हर पहलू को बारीकी से खंगाला और एक-एक बिंदु की पड़ताल की।
बताया जा रहा है कि SIT जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंप सकती है।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठाए थे।
इसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया और योगी सरकार ने जांच के लिए SIT का गठन कर दिया।
SIT को 7 दिनों के भीतर अपनी प्राथमिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन टीम ने 6 दिन में ही अपना फील्ड वर्क पूरा कर लिया।
इस बीच हनुमानगढ़ी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत संजय दास का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित SIT जांच कर रही है और सच सामने आना तय है।महंत संजय दास ने यह भी कहा कि यदि राम मंदिर के चढ़ावे के मामले में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो।
कहां गई 60 किलो चांदी की ईंटों और अखंड ज्योति?
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हुए हेरफेर में रोजाना जांच के दौरान नई परतें खुल रहीं हैं। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन ने ट्रस्ट पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि 60 किलो चांदी की ईंटों और अखंड ज्योति का हिसाब नहीं मिला।
राम मंदिर के चढ़ावा प्रकरण में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इससे मंदिर प्रबंधन पर लग रहे आरोपों के साथ-साथ संदेह भी बढ़ता जा रहा है। मंदिर निर्माण के समय दान देने वाले कुछ श्रद्धालु खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और दान में दी गई वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी के अनुसार, देशभर के सराफा कारोबारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी एकत्र की थी। इसे गलाकर एक से सवा किलो वजन की ईंटें तैयार की गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र अंकित थे। इसके अलावा ऋषिकेश एसोसिएशन की ओर से एक किलो चांदी का कलश भी भेंट किया गया था। ईंटों को नींव पूजन में उपयोग करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन बाद में इनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
एक किलो के दो चांदी के दीपक, दो चांदी के कटोरे, 200 ग्राम की पंचधातु सिल्ली और नाग-नागिन का जोड़ा दिया था। एक दीपक में डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी ने अखंड ज्योति जलाई थी, जो प्राण प्रतिष्ठा के दौरान तस्वीरों में भी दिखाई दी थी। हालांकि, मंदिर बनने के बाद न तो वह दीपक दिखाई दे रहा है और न ही भोग के लिए दिए कटोरे। उन्होंने सभी दान सामग्री का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
न्यायिक आयोग बनाने के लिए याचिका
चढ़ावे में हेरफेर मामले में उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने के अनुरोध वाली एक नई जनहित याचिका (पीआईएल) शनिवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल हुई है। कोर्ट के रजिस्ट्री अनुभाग में इस पीआईएल पर अगले सप्ताह सुनवाई संभावित है। अधिवक्ता मोतीलाल यादव की पीआईएल में राज्य सरकार समेत पुलिस महानिदेशक, अयोध्याडीएम, एसएसपी, ट्रस्ट सचिव को पक्षकार बनाया गया है।