अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर गंगोत्री सेवा समिति एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में गंगा के तट दशाश्वमेध घाट पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 5,000 श्रद्धालुओं और योग साधकों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक योगाभ्यास किया।
ठसाठस भरी भीड़ के बीच “हर-हर महादेव”, “बाबा विश्वनाथ” एवं “माँ गंगा” के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान हो उठा। निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार उपस्थित श्रद्धालुओं ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया तथा स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर योग गुरु जगदीश त्रिपाठी ने योग के वास्तविक स्वरूप और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग की मूल परिभाषा है — “युज्य मेलने”, अर्थात् जुड़ जाना। उन्होंने बताया कि योग का अर्थ केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वयं के विभिन्न आयामों को एक-दूसरे से जोड़ने की प्रक्रिया है।
कार्यक्रम के दौरान गंगोत्री सेवा समिति के महासचिव दिनेशशंकर दुबे ने सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर संस्था के सदस्य संथा प्रसाद , दिनेश सैनी एवं संजय सेठ का सहयोग रहा। योग साधना सत्र का संचालन एवं निर्देशन योगाचार्य जगदीश त्रिपाठी ने किया।
समारोह के अंत में आर्ट ऑफ लिविंग की शिक्षिका मोनिका अग्रवाल ने उपस्थित अतिथियों, श्रद्धालुओं तथा कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले समिति के सभी सदस्यों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।