दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान जब रमज़ान के महीने में रोज़ा रखते हैं, तो इफ्तार का एक दृश्य लगभग हर जगह एक जैसा होता है सूरज ढलता है, अज़ान की आवाज़ गूंजती है और रोज़ा खजूर से खोला जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर खजूर ही क्यों?
इस्लाम में रमज़ान को बेहद पाक और खास महीना माना जाता है। सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहना सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि सब्र, आत्मचिंतन और अनुशासन का अभ्यास भी है। रोज़ा खोलने के लिए खजूर खाने की सलाह पैगंबर मुहम्मद ने दी थी। कुरान में भी खजूर का कई जगह उल्लेख मिलता है। इसलिए यह एक सुन्नत भी है और आस्था से जुड़ी परंपरा भी।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जो बात 1400 साल पहले बताई गई, आज विज्ञान भी उसे सही ठहराता है। पूरे दिन बिना खाए-पिए रहने के बाद शरीर को सबसे पहले ऊर्जा की जरूरत होती है। खजूर में प्राकृतिक शर्करा ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ पाई जाती है, जो तेजी से खून में घुलकर तुरंत ऊर्जा देती है। इससे कमजोरी और चक्कर आने की संभावना कम होती है।
सिर्फ इतना ही नहीं, खजूर में फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं। इसका मतलब है कि यह तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ धीरे-धीरे स्थिर ऊर्जा भी प्रदान करता है। इससे शरीर को अचानक भारी भोजन का झटका नहीं लगता और ब्लड शुगर संतुलित रहता है।
खजूर पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। पोटैशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा कम होता है। इसलिए अक्सर इफ्तार में खजूर के साथ पानी लिया जाता है एनर्जी भी और हाइड्रेशन भी।
रोज़े के दौरान पाचन तंत्र दिनभर आराम की स्थिति में रहता है। ऐसे में अचानक भारी और तला-भुना खाना खाने से परेशानी हो सकती है। खजूर का फाइबर पाचन को धीरे-धीरे सक्रिय करता है और कब्ज की समस्या से भी राहत देता है। साथ ही यह पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे ओवरईटिंग की संभावना कम हो जाती है।
आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग को सेहत के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन रमज़ान के रोज़े सदियों से अनुशासित उपवास का उदाहरण रहे हैं। यहां आस्था और विज्ञान का अनोखा मेल दिखाई देता है।
आखिर में, खजूर सिर्फ एक फल नहीं है। यह परंपरा, सेहत और संयम का प्रतीक है। जब करोड़ों लोग एक साथ खजूर से रोज़ा खोलते हैं, तो वह सिर्फ भूख मिटाने का पल नहीं होता—वह शुक्र, सादगी और साझा भावना का भी प्रतीक होता है।