लखनऊ।उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव फ़िलहाल वक्त पर नहीं हो पाएंगे। इसकी प्रमुख वजह है कि अब तक मतदाता सूची ही फ़ाइनल नहीं हो पाई है। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने पांचवीं बार फ़ाइनल सूची की नई तारीख़ तय की है।
उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने एक अधिसूचना जारी की जिसके मुताबिक़ पंचायत चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 जून को किया जाएगा। हालांकि इससे पहले अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख़ बदलते हुए पहले छह फरवरी, 28 मार्च, 15 अप्रैल और फिर 22 अप्रैल की गई थी।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में जब 10 जून को अंतिम मतदाता सूची आएगी तो तय है कि पंचायतों के चुनाव तय समय से नहीं हो पाएंगे।
क्यों फंसा है पेंच
अब सवाल ये कि आख़िर मतदाता सूची फ़ाइनल करने में क्या परेशानी आ रही है। तो आपको बता दें कि क़रीब सवा करोड़ नामों को लेकर सूची में अड़चन है। ये वो नाम हैं जो सूची में रिपीट हो रहे हैं। इन नामों में न सिर्फ मतदाता का नाम दोबारा या तिबारा है बल्कि उनके पिता का नाम और पता भी समान हैं। ऐसे में वास्तविक मतदाताओं की तुलना में सूची में ज्यादा नाम दर्ज है। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग चाहता है कि चुनावों से पहले मतदाता सूची शुद्ध हो जाए।
हालांकि आयोग ने 23 सितंबर 2025 को अनंतिम सूची जारी की थी। अंतिम मतदाता सूची जारी करने के लिए 15 जनवरी की तारीख़ तय की थी। लेकिन इसके बाद अंतिम सूची के लिए बार बार तारीख़ बदलनी पड़ी है। ऐसे में अब तीसरी बार आयोग ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए डुप्लीकेट नामों के सत्यापन के लिए कहा है। इससे पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ ने घर घर जाकर मतदाताओं का डाटा लिया था। इस दौरान वोटरों के नाम जोड़े और हटाए गए थे।
अब कब होंगे चुनाव
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने का मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। अदालत ने तय समय पर चुनाव आवश्यक माना था और आयोग से डिटेल में जवाब मांगा है।
पंचायत चुनाव में देरी की कई और भी वजहें हैं जिनमें एक प्रमुख आरक्षण का तय किया जाने का मुद्दा है। अंतिम मतदाता सूची से डुप्लिकेट नाम हटाने की प्रक्रिया के बाद यह तय होना है कि कौन सी पंचायत किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। इस प्रक्रिया में भी वक्त लगेगा।