संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की सरकार और वहां की राजनीतिक व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करता है, जबकि उसे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने पाकिस्तानी राजनीति में सेना के प्रभाव, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में शनिवार को अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव रघू पुरी ने पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने देश के हालात से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है।
पाकिस्तान की सरकार और देश के हालात पर सवाल
रघू पुरी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर हालत में है और देश के कई हिस्सों में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों का भी जिक्र किया।
भारत ने पाकिस्तान को खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक के हालात पर ध्यान देने की सलाह दी। भारतीय पक्ष का कहना था कि पाकिस्तान को दूसरे देशों पर आरोप लगाने के बजाय अपने यहां की समस्याओं को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
'पाकिस्तान में सेना ही असली ताकत'
भारत ने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के दखल का मुद्दा भी उठाया। रघू पुरी ने कहा कि वहां सेना के हित सबसे ऊपर हैं और वही देश की असली ताकत है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत पाकिस्तानी प्रतिनिधि की परेशानी समझ सकता है, क्योंकि वहां की सरकार के पास सेना के निर्देशों को नजरअंदाज करने की स्थिति नहीं है।
इस दौरान पुरी ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार के लिए 'फॉर्म 47 सरकार' शब्द का इस्तेमाल किया। यह शब्द 2024 के आम चुनावों में कथित धांधली और चुनावी नतीजों में गड़बड़ी के आरोपों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है।
क्या है पाकिस्तान की 'फॉर्म 47 सरकार'?
पाकिस्तान में फॉर्म 47 एक आधिकारिक चुनावी दस्तावेज है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदान के समेकित नतीजे दर्ज होते हैं।
फरवरी 2024 में हुए आम चुनावों के बाद चुनावी नतीजों में हेरफेर और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसी वजह से पाकिस्तान सरकार के आलोचक उसे 'फॉर्म 47 सरकार' कहते हैं। भारत ने इस शब्द का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भारत ने उठाए सवाल
संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान के रुख पर सवाल किया। भारतीय पक्ष ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करता है, लेकिन उसके अपने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठते हैं।
रघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान में आजादी के बाद से अल्पसंख्यकों की आबादी काफी घट गई है। उन्होंने पाकिस्तान से दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने देश के हालात सुधारने और नागरिकों के हितों पर ध्यान देने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख
पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बीच भारत ने अपने रुख को फिर स्पष्ट किया। भारत ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
भारत के मुताबिक, अब केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली कराने का मुद्दा बाकी है।
भारत ने अपनी विविधता और संविधान का किया जिक्र
अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर अपनी बात रखते हुए भारत ने कहा कि उनकी सुरक्षा और अधिकारों को बढ़ावा देना हर देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
रघू पुरी ने भारत को दुनिया के सबसे विविध समाजों में से एक बताते हुए कहा कि यहां अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और समुदायों के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि विविधता भारतीय सभ्यता की पहचान रही है और देश को इस पर गर्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है। अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वे संवैधानिक पदों, सरकारी संस्थानों, सेना, कानून-व्यवस्था, फिल्म जगत और कारोबार समेत कई क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
पुरी ने कहा कि पाकिस्तान में ऐसे उदाहरण ढूंढना उनके लिए मुश्किल है।