West Bengal Assembly Elections 2026 : अमित शाह ने शेयर किया विजन

Authored By: News Corridors Desk | 15 Apr 2026, 06:46 PM
news-banner

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। अमित शाह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। इसी कड़ी में शाह ने दार्जिलिंग क्षेत्र को लेकर अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया है, खासतौर पर गोरखा समुदाय से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर।
खराब मौसम के चलते अमित शाह तय कार्यक्रम के अनुसार लेबोंग नहीं पहुंच सके, जिसके कारण उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए दार्जिलिंग के लोगों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तो गोरखा समुदाय के मुद्दों को सबसे पहले सुलझाया जाएगा। उन्होंने इसे अपनी प्राथमिकता बताते हुए भरोसा दिलाया कि इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।


अमित शाह ने अपने संदेश में गोरखा आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए पुलिस मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी लंबित केस वापस ले लिए जाएंगे। यह घोषणा गोरखा समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वर्षों से ये मुद्दे उनके लिए एक बड़ी चिंता का विषय रहे हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि गोरखा समुदाय के साथ न्याय किया जाएगा और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। शाह ने यह विश्वास जताया कि भाजपा सरकार बनने के बाद क्षेत्र में शांति और विकास दोनों को सुनिश्चित किया जाएगा।


अमित शाह ने खराब मौसम के कारण लोगों से न मिल पाने पर खेद भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे 21 अप्रैल को कुर्सियांग के सुकना में आयोजित जनसभा में जरूर शामिल होंगे और वहां सीधे जनता से संवाद करेंगे। इस दौरान वे दार्जिलिंग के विकास और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान पर विस्तार से चर्चा करेंगे। दार्जिलिंग क्षेत्र लंबे समय से गोरखालैंड की मांग को लेकर चर्चा में रहा है। यहां के नेपाली भाषी भारतीयों द्वारा अलग राज्य की मांग कई दशकों से की जा रही है। इस मांग को लेकर अतीत में कई बार आंदोलन हुए, जिनमें कुछ हिंसक भी रहे। इन आंदोलनों का असर न केवल राजनीति बल्कि सामाजिक जीवन पर भी पड़ा है।


वर्ष 2011 में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौते के बाद गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (GTA) का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना था। हालांकि, इसके बावजूद 2017 तक क्षेत्र में आंदोलन और असंतोष जारी रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या पूरी तरह हल नहीं हो पाई है।
इस क्षेत्र की राजनीति में स्थानीय दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट जैसे दल लंबे समय से गोरखा समुदाय की आवाज उठाते रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां भी समय-समय पर इन दलों के साथ गठबंधन करती रही हैं। वर्तमान चुनावी परिदृश्य में भी गठबंधनों की भूमिका अहम नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस ने अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) के साथ गठबंधन किया है। इस गठबंधन के तहत दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियांग की सीटें BGPM को दी गई हैं। दूसरी ओर, भाजपा को एक बार फिर बिमल गुरुंग का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।


अमित शाह ने अपने संबोधन में यह दावा भी किया कि राज्य में अब तक हुई चुनावी सभाओं और जनता के समर्थन को देखते हुए भाजपा को इस बार जीत का पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि पार्टी तृणमूल कांग्रेस को हराकर पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी। दार्जिलिंग में चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इसके बाद 4 मई को मतगणना के साथ चुनाव परिणाम सामने आएंगे। इन चुनावों के नतीजे न केवल राज्य की राजनीति बल्कि दार्जिलिंग और गोरखा समुदाय के भविष्य के लिए भी अहम साबित होंगे।


कुल मिलाकर, इस बार का चुनाव दार्जिलिंग में सिर्फ राजनीतिक सत्ता का नहीं, बल्कि गोरखा समुदाय की उम्मीदों और मांगों के समाधान का भी चुनाव बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पार्टी पर भरोसा जताती है और आने वाले समय में क्षेत्र की दिशा क्या होती है।