दिल्ली। नारी शक्ति वंदन क़ानून में संशोधन के साथ सरकार की तरफ़ से जो दो अन्य विधेयक लोकसभा में लाए गये थे उन्हें आरक्षण बिल गिरने के बाद सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया। इनमें परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल थे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सुक्रवार को संविधान संशोधनों पर लोक सभा में चर्चा का उत्तर दिया।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में जिक्र किया गया है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1971 में विपक्षी पार्टी की सरकार ने इसे फ्रीज़ किया था और इसी कारण हमें इसका जिक्र करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि 2001 में 84वां संशोधन हुआ और 2026 तक सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया। 1976 से 2026 तक के 50 वर्षों तक देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। शाह ने कहा कि 2026 में यह सीमा समाप्त हो गई है और अब परिसीमन करने पर यह प्रक्रिया 2029 से पहले पूरी नहीं हो सकती क्योंकि परिसीमन आयोग को हर मतक्षेत्र में जाकर पब्लिक हियरिंग देनी होती है।
उन्होंने कहा कि एक और भ्रांति फैलाई गई कि दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय होगा। श्री शाह ने कहा कि दक्षिण के राज्यों का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार का। गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष को उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव के साथ देश के टुकड़े-टुकड़े नहीं करने चाहिए बल्कि इससे ऊपर उठना चाहिए।
शाह ने कहा कि यदि समग्र रूप से दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को देखा जाए, तो वर्तमान में 543 सदस्यीय सदन में 129 सांसद दक्षिणी राज्यों से आते हैं, जो लगभग 23.76 प्रतिशत है। प्रस्तावित 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद यह संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी और 816 सदस्यीय सदन में उनका प्रतिनिधित्व लगभग 23.87 प्रतिशत, अर्थात लगभग 24 प्रतिशत हो जाएगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमने delimitation commission Act के अंदर कोई बदलाव नहीं किया है, पुराने एक्ट को full stop और comma के साथ repeat किया है। उन्होंने कहा कि यदि अतीत में इस अधिनियम का उपयोग किसी प्रकार के हेरफेर के लिए किया गया होगा, तो उस पर वे टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन वर्तमान सरकार ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट तभी लागू होगी, जब संसद उसे अनुमोदित करेगी और राष्ट्रपति महोदया की स्वीकृति प्राप्त होगी। इसलिए यह प्रक्रिया 2029 से पहले लागू होने का प्रश्न ही नहीं उठता।
शाह ने कहा कि जब से यह बिल आया है तब से विपक्ष ने भ्रांतियां फैलानी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहली भ्रांति फैलाई गई कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार यह संविधान संशोधन लेकर आई है। श्री शाह ने कहा कि सरकार तीन माह पहले ही जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुकी है, इसीलिए जाति जनगणना को टालने का सवाल ही नहीं उठता।