संसद में महिला आरक्षण बिल पर गरमाई बहस, पीएम मोदी और प्रियंका गांधी के बीच तीखा वार-पलटवार

Authored By: News Corridors Desk | 17 Apr 2026, 03:05 PM
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संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण बिल को लेकर गुरुवार को जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप और तर्क-वितर्क का दौर लगातार चलता रहा। बहस का मुख्य मुद्दा महिला आरक्षण बिल को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने को लेकर था, जिस पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सदन में महिला आरक्षण बिल के समर्थन में अपनी बात रखते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्षी सांसदों द्वारा काले कपड़े पहनने पर चुटकी लेते हुए कहा कि भारत में शुभ कार्यों के दौरान ‘काला टीका’ लगाया जाता है, ताकि नजर न लगे। पीएम ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष का यह कदम भी उसी तरह का है और इसके लिए उन्होंने उनका धन्यवाद भी किया। उन्होंने विशेष रूप से डीएमके सांसदों की ओर इशारा करते हुए यह टिप्पणी की।

पीएम मोदी के इस बयान के बाद सदन का माहौल और अधिक गरमा गया। कुछ समय बाद कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi ने अपने भाषण में इस मुद्दे को उठाया और प्रधानमंत्री के तंज का जवाब दिया। प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से अलग कर दिया जाए, तो यह बिल तुरंत पारित किया जा सकता है।

उन्होंने अपने भाषण में कहा, “अगर सरकार सच में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो इसे परिसीमन से अलग कर दीजिए। इससे आज ही यह शुभ कार्य पूरा हो जाएगा और देश को अनावश्यक प्रक्रिया से भी नहीं गुजरना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसा करने से ‘काला टीका’ भी काम आ जाएगा और देश का नुकसान भी नहीं होगा।

विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने से इसकी प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिससे महिलाओं को इसका लाभ मिलने में समय लगेगा। वहीं सरकार का कहना है कि परिसीमन के बाद ही इस आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।

इस बहस के दौरान सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी, लेकिन दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क मजबूती से रखे। महिला आरक्षण बिल लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं।

कुल मिलाकर, संसद का यह सत्र महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक तकरार के लिए भी याद किया जाएगा, जहां मुद्दे के साथ-साथ बयानबाजी भी चर्चा का केंद्र बनी रही।