महिला आरक्षण पर PM मोदी का संबोधन: बिल पास न होने पर जताया खेद, विपक्ष पर साधा निशाना

Authored By: News Corridors Desk | 18 Apr 2026, 09:14 PM
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शनिवार को देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, राजनीति में उनकी भागीदारी और संसद में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सही समय का इंतजार कीजिए, आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने का संकल्प जरूर पूरा होगा।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वह देश की बहनों और बेटियों से सीधे संवाद करने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश देख रहा है कि किस तरह नारी शक्ति की प्रगति को रोका गया और उनके सपनों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार के प्रयासों के बावजूद नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पारित नहीं हो सका। इसके लिए उन्होंने देश की सभी माताओं और बहनों से क्षमा मांगी।

उन्होंने आगे कहा कि महिला हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को विपक्ष ने समर्थन नहीं दिया, जिसके कारण यह पारित नहीं हो पाया। उनके अनुसार, इससे महिलाओं के सपनों को आघात पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं सब कुछ भूल सकती हैं, लेकिन अपने सम्मान से जुड़ी बातों को नहीं भूलतीं, और आज की जागरूक नारी हर घटना को समझती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशहित सरकार के लिए सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ को प्राथमिकता देते हैं और दलहित को देशहित से ऊपर रखते हैं, तो इसका नुकसान देश और विशेष रूप से नारी शक्ति को उठाना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों की राजनीति के कारण महिलाओं को इस बार भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पूरे देश के लिए लाभकारी होता और इससे उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम—सभी क्षेत्रों को मजबूती मिलती। लेकिन इसका समर्थन नहीं किया गया। उन्होंने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि उनके इस रुख ने महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है और यह नारी सम्मान के खिलाफ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों का व्यवहार ऐसा था मानो महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर भी वे संतुष्ट थे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि नारी के स्वाभिमान और आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने जैसा था।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अपमान को कभी नहीं भूलतीं और संसद में जो कुछ हुआ, उसकी याद देश की नारी शक्ति के मन में बनी रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जो दल इस संशोधन के विरोध में थे, वे नारी शक्ति को हल्के में ले रहे हैं।

परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विषय को लेकर भ्रम फैलाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परिसीमन होता, तो सभी राज्यों में सीटों की संख्या संतुलित रूप से बढ़ती। साथ ही, उन्होंने कुछ दलों की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए उन्हें महिला आरक्षण के विरोध में बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल सुधारों के खिलाफ खड़े रहते हैं और हर निर्णय का विरोध करते हैं। उनके अनुसार, इस तरह की राजनीति देश के विकास में बाधा बनती है और इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधेयक का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की सोच और दिशा से जुड़ा विषय है।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि महिला आरक्षण समय की मांग है और सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि सही समय आने पर यह संकल्प जरूर पूरा होगा और नारी शक्ति को उनका उचित स्थान मिलेगा।